OSI Model क्या है ? What is OSI Model in Hindi?

by Vikas Sharma August 17, 2019 at 7:19 pm

OSI Model का पूरा नाम Open System Interconnection Model है| OSI Model को ISO ने develop किया है|ISO का पूरा नाम International Organization for Standardization है| OSI Model को ISO ने 1978 में बनाया था|

OSI मॉडल में 7 layers होती है| OSI model किसी नेटवर्क में दो यूज़र्स के मध्य कम्युनिकेशन के लिए एक reference मॉडल है। 

Seven Layers of OSI model / OSI मॉडल की सात layers

OSI model में Seven layers होती है आईये उनके बारे में समझते है |

हम OSI model को sender के माध्यम से समझेंगे जिसमे sender डाटा send कर रहा है और इसमें सबसे पहली layer Application आयेगी और Physical layer सबसे लास्ट layer|

Receiver के लिए फिजिकल layer पहली layer होगी और एप्लीकेशन layer लास्ट layer

Application Layer

Application Layer का मुख्य कार्य हमारी वास्तविक एप्लीकेशन तथा अन्य लयरों के मध्य interface कराना है। Application Layer में एप्लीकेशन सॉफ्टवेर काम करते है | user, एप्लीकेशन सॉफ्टवेर के द्वारा अपना डाटा receiver को भेजता है |

Protocol of Application Layer / एप्लीकेशन layer के प्रोटोकॉल

HTTP IRC TELNET

HTTPs FMTP NNTP

FTP DHCP POP3

NFS SNMP

File transfer करने के लिए FTP का use होता है |

Web सर्फिंग करने के लिए HTTP/ HTTPs का use होता है |

E – Mail भेजने के लिए POP ,SNMP का use होता है |

Presentation Layer

Presentation Layer , application layer से डाटा receiver करता है|

Presentation Layer को ट्रांसलेशन लेयर भी कहा जाता है क्यूकी इस layer का काम प्रेजेंटेशन layer से आये हुए डाटा को binary फॉर्मेट में ट्रांसलेट करना होता है|

Application layer से डाटा characters and number की form में रिसीव करता है |

प्रेजेंटेशन layer , characters and number को binary फॉर्मेट में convert करता है |

प्रेजेंटेशन layer के फंक्शन / Function of Translation Layer

Translation

प्रेजेंटेशन लेयर का सबसे पहला काम एप्लीकेशन लेयर से रिसीव हुए डाटा को बाइनरी फॉर्मेट में ट्रांसलेट करना होता है|

Example :-

SDHSMH5456 – > translate into binary form -> 00110001010001000

Data Compression

प्रेजेंटेशन लेयर का दूसरा काम बाइनरी फॉर्मेट में ट्रांसलेट किये गये डाटा को कॉम्प्रेस करना होता है जिससे इसका साइज़ कम हो जाये|

Exmple :-

00110001010001000 -> after compress -> 0010101100

Encryption

प्रेजेंटेशन लेयर का अगला काम कॉम्प्रेस किये गये डाटा को encrypt करना होता है जिससे की कोई हैकर इसे पढ़ न सके|

Exmple :-

0010101100 -> encryption applied -> &^%**%$^$^#@

Session Layer

Session layer, sender और receiver के बीच में कनेक्शन मैनेज करता है |

Session लेयर का काम कनेक्शन जोड़ना उसे मैनेज करना और बाद में जब जरूरत न रहे तो कनेक्शन को बंद करना|

Session layer के फंक्शन / Function of Session Layer

Authentication

Session Layer का सबसे पहला काम connection establishment करना होता है और session layer इस काम को authentication process के द्वारा करती है|

Example : –

मान को आपका facebook में आपका अकाउंट है आपको अपनी profile को access करने के लिए या facebook के server के साथ session establish करने के लिए अपना username और password enter करना पड़ता है इसी process को authentication process कहते है|

Session layer हमारा connection facebook के साथ establish करता है फिर manage करता है बाद में जब हम logout करते है तो terminate करता है|

Authorization

Sesison layer का दूसरा काम authorization है जिससे session layer यह check करता है कि किसको connection establish करने की authority है और किसे नहीं|

Session Management

जब connection establish हो जाता है तब session layer का काम कनेक्शन को manage करना होता है|

Transport Layer

Transport layer , रिलायबिलिटी of कम्युनिकेशन को कण्ट्रोल करता है

ट्रांसपोर्ट layer में डाटा सेगमेंट में convert हो जाता है |

इस लेयर में जो प्रोटोकॉल है उनसे end-to-end डाटा transport सर्विसेज प्राप्त होती है और इनके द्वारा sending host से destination host के बीच काल्पनिक कनेक्शन बनाये जाते है |

Transport Layer में डाटा दो तरीके से जाता है :-

1. Connection Oriented 2. Connection Less

Connection Oriented

Connection oriented communication डाटा के सही तरीके से बिना किसी खराबी के पहुंचने और रिट्रांसमिशन की जिम्मेवारी लेता है, यह communication कुछ services प्रोवाइड करता है, जो निम्नलिखित है

Connection oriented, call setup or three way handshake के नाम से जाना जाता है, उसके बाद डाटा ट्रान्सफर होता है | प्रोसेस पूरा होने के बाद वर्चुअल सर्किट कनेक्शन को बंद कर दिया जाता है |

Step for Connection Oriented Session

सबसे पहले कनेक्शन अग्रीमेंट होता है जिसमे सेगमेंट के द्वारा सिंक्रोनाइजेशन की रिक्वेस्ट की जाती है |

इसके बाद सेगमेंट की रिक्वेस्ट को स्वीकार (acknowledge) (ACK) किया जाता है रूल्स के अकार्डिंग एक कनेक्शन बनाया जाता है | रिसीवर से आने वाले सेगमेंट को एक बार सिंक्रोनाइज किया जाता है ताकि दोनों तरफ कनेक्शन बना रहे |

फाइनल सेगमेंट जब सेंडर के द्वारा भेजा जाता है, वो एक तरह का acknowledgement होता है जो डेस्टिनेशन होस्ट को बताता है कि कनेक्शन अग्रीमेंट एक्सेप्ट कर लिया गया है और अब वास्तविक कनेक्शन बना के डाटा ट्रांसफर किया जा सकता है |

पर तब क्या होता है जब एक सिस्टम के द्वारा तेज़ी से डाटा सेंड किया जाता है, इस कनेक्शन में रिसीवर के द्वारा रिसीव किया गया डाटा एक मेमोरी में सेव कर लिया जाता है जिसे buffer कहा जाता है | पर buffer की भी एक सीमा होती है तो ओवरफ्लो होने पर आने वाले डाटा को रोक दिया जाता है |

Functions of Transport Layer / ट्रांसपोर्ट layer के फंक्शन

Segmentation :  Data को भेजने से पहले छोटे-छोटे segments में convert करता है,

Flow Control : इसमें डाटा के ट्रांसफर रेट को निर्धारित किया जाता है, अगर इसका निर्धारण सही तरीके से नहीं होता तो डाटा का flow स्टार्ट हो जाता है जैसे कि हम मान लेते हैं की एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस पर 10 एमबीपीएस की स्पीड से डाटा भेज रहा है तथा दूसरा डिवाइस से 2 एमबीपीएस की स्पीड से डाटा रिसीव कर रहा है तो हर सेकंड के हिसाब से 8MB डाटा लॉस्ट हो जायेगा |

Error Control : इसमें डाटा को send करते समय जो error आई है उसे कण्ट्रोल किया जाता है|

Network layer

Transport layer , सेगमेंट को नेटवर्क layer को ट्रान्सफर करता है |

नेटवर्क layer में जो डाटा यूनिट होता है उसे हम Packet कहते है |

Functions of Network Layer / नेटवर्क layer के फंक्शन

Logical Addressing : नेटवर्क लेयर डाटा को नेटवर्क में यात्रा करने के लिए आईपी ऐड्रेस देती है यह आईपी ऐड्रेस डाटा को मंजिल तक पहुंचाने में जिम्मेवार होता है।

Routing : डाटा को एक लेयर से दूसरी लेयर में भेजने की जिम्मेवारी भी नेटवर्क लेयर के पास होती है,

Path Determination : Path determination से डाटा को सही path के द्वारा इसके डेस्टिनेशन तक भेजा जाता है|

Data Link Layer

Data link layer , नेटवर्क layer से डाटा पैकेट को रिसीव करता है |

Data link layer, डाटा को फिजिकल ट्रांसमिशन की सुविधा देता है और साथ ही साथ error notification और flow control को हैंडल करता है |

इसका मतलब डाटा लिंक लेयर, हार्डवेयर address का इस्तेमाल करके ये सुनिश्चित करता है कि मेसेज LAN के अंदर प्रॉपर डिवाइस तक पहुंचा कि नहीं और ये messages को फिजिकल लेयर के लिए नेटवर्क लेयर से bits में translate भी करता है |

IEEE Ethernet के डाटा लिंक लेयर की 2 और सब लेयर्स है :-

Media Access Control (MAC)

Data link layer यह बताती है कि पैकेट्स मीडिया से कैसे भेजे जायेंगे | यहाँ पर मीडिया का एक्सेस “पहले आओ पहले पाओ” के आधार पर किया जाता है क्योंकि सब एक ही bandwidth को शेयर कर रहे होते है | फिजिकल addressing इसी लेयर में में बताई गयी है और साथ ही साथ logical typologies भी इसी लेयर में बताई गई है |

Logical Link Control (LLC)

इसका काम नेटवर्क लेयर प्रोटोकॉल को की पहचान करना है और फिर उनको encapsulate करना है |एक बार फ्रेम रिसीव होने के बाद LLC header, डाटा लिंक लेयर को यह बताता है कि पैकेट के साथ क्या करना है |

ये इस तरह काम करता है :- जब होस्ट एक फ्रेम रिसीव करता है तो LLC header में देखता है कि यह पैकेट कहाँ जाना है | उदहारण के लिए नेटवर्क लेयर में IP Protocol, कण्ट्रोल बिट्स की sequencing करना और फ्लो कण्ट्रोल भी इसी का काम है |

Functions of Data Link Layer / डाटा लिंक layer के फंक्शन

Physical Addressing

इसमें डाटा पैकेट में MAC address को जोड़ कर FRAME बनायीं जाती है |

Physical layer

इस लेयर में डिजिटल सिग्नल, इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदल जाता है।इस लेयर में नेटवर्क की topology अर्थात layout of network(नेटवर्क का आकार) का कार्य भी इसी लेयर में होता है।

Physical layer , binary bits को signal में convert करता है और लोकल मीडिया में transmit कर देता है |

Functions of Physical Layer / फिजिकल लेयर के फंक्शन

Data rate – Physical layer डाटा का रेट निर्धारित करती है जैसे कि एक सेकंड में कितने bits ट्रांसफर करना है।

Synchronization- physical layer सेंडर और रिसीवर को सिंक्रोनाइज करती है,

Signal- यह लेयर बिट्स को सिग्नल में कन्वर्ट करके भेजती है।

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